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Showing posts from May, 2026

हिंदी भाषा पर विद्वानों के विचार व कथन। राजभाषा हिंदी

 हिंदी भाषा पर विद्वानों के विचार व कथन Ø   महात्मा गाँधी जी- ‘’ हिन्दी सम्पूर्ण देश के जन-जन की भाषा है। हिन्दी ही एकमात्र भाषा हमारी राष्ट्रभाषा हो सकती है। कोई भी राष्ट्र तब तक उन्नति नहीं कर सकता जब तक कि इसकी कोई राष्ट्रभाषा न हो। ” Ø   मैथिलीशरण गुप्त जी- ‘’ हिन्दी है भारत की बिंदी , हिंदी है भारत की पहचान , हिंदी से ही तो हम सबकी , बनती है सच्ची पहचान। ” Ø   स्वामी दयानंद- ‘ ’ हिंदी द्वारा सारे भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है। '' Ø   महावीर प्रसाद द्विवेदी- ‘’ आप जिस तरह बोलते है , बातचीत करते है , उसी तरह लिखा भी कीजिए। भाषा बनावटी नहीं होनी चाहिए। ‘’ Ø   सुमित्रानंदन पंत- ‘’ हिंदी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलतम स्त्रोत है। ’’ Ø   पंडित जवाहरलाल नेहरु- ‘’ हिंदी हमारे देश को एक सूत्र में बाँधने वाली भाषा है। ‘’ Ø   सुभाषचन्द्र बोस- '' देश के सबसे बड़े भूभाग में बोली जाने वाली हिन्दी , राष्ट्रभाषा पद की अधिकारिणी है। ’' Ø   भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद- ‘’ जिस देश को अपनी भाषा और अपने साहित्य के गौरव ...

हिंदी को ही राजभाषा क्यों बनाया गया?

            हिंदी को ही राजभाषा क्यों बनाया गया?  👉भारत बहुभाषा-भाषी राष्ट्र है। हमारे यहाँ अनेक भाषाओं की समृद्ध परंम्परा है। हम सबने यह कहावत भी सुनी है- ‘’ कोस-कोस पर पानी बदले , चार कोस पर वाणी। ’’ यह हमारे राष्ट्र के संदर्भ में बिल्कुल सटीक बैठता है। देश के विभिन्न प्रांतो में अलग अलग भाषाएं बोली जाती हैं। इसमें हिंदी ही एकमात्र ऐसी भाषा है जो सभी भाषा-भाषियों के बीच सेतु का काम करती है। इसे बोलना , समझना , लिखना , पढ़ना अपेक्षाकृत आसान है। हिन्दी भाषा का इतिहास बड़ा समृद्ध है। भक्तिकाल में उत्तर से दक्षिण तक , पूर्व से पश्चिम तक अनेक सन्तों ने हिन्दी में अपनी रचनाएँ कीं और लोगों का मार्गदर्शन किया। केवल उत्तरी भारत की नहीं , बल्कि दक्षिण भारत के आचार्यों वल्लभाचार्य , रामानुज , रामानन्द आदि ने भी हिंदी भाषा के माध्यम से अपने मतों का प्रचार किया था। 18वीं शताब्दी में राजस्थान के कई राजवाड़े हिन्दी (ब्रजभाषा) में कार्य कर रहे थे। 1816 ई. में एक अंग्रेजी मिशनरी , विलियम केरी ने लिखा कि हिन्दी किसी एक प्रदेश की भाषा नहीं , बल्कि देश मे...

हिंदी साहित्य ज्ञानपीठ पुरस्कार से जुड़े प्रश्न

                           हिंदी साहित्य ज्ञानपीठ पुरस्कार से जुड़े प्रश्न ‘ ज्ञानपीठ पुरस्कार ’ किस क्षेत्र में श्रेष्ठ कार्य के लिए दिया जाता है-  साहित्य के क्षेत्र में  ‘ ज्ञानपीठ पुरस्कार ’ की स्थापना कब हुई थी- 1961ई. प्रथम भारतीय ‘ ज्ञानपीठ पुरस्कार ’ किस वर्ष दिया गया- 1965 ई. ‘ ज्ञानपीठ पुरस्कार ’ से सम्मानित होने वाले हिंदी के प्रथम साहित्यकार है- सुमित्रानंदन पंत   महादेवी वर्मा को किस काव्य रचना के लिए ' ज्ञानपीठ ’ पुरस्कार मिला है- यामा (1982 ई.) रामधारी सिंह दिनकर को ‘ ज्ञानपीठ पुरस्कार ’ किस कृति के लिए मिला- उर्वशी  (1972 ई.) सुमित्रानंदन पंत को ‘ ज्ञानपीठ पुरस्कार ’ किस रचना के लिए मिला- चिदम्बरा  (1968 ई.) महादेवी वर्मा को ' ज्ञान-पीठ ’ पुरस्कार किस वर्ष में मिला था- 1982 ई. दिनकर जी को किस वर्ष ‘ ज्ञानपीठ पुरस्कार ’ से सम्मानित किया गया था- 1972 ई. सुमित्रानंदन पंत को किस वर्ष ‘ ज्ञानपीठ पुरस्कार ’ से सम्मानित किया गया था- 1968 ई. अज्ञेय को ‘ ज्ञानपीठ...

औपचारिक शिक्षा और अनौपचारिक शिक्षा में अन्तर/ Formal Education & Informal Education/

                                औपचारिक शिक्षा और अनौपचारिक शिक्षा औपचारिक शिक्षा-         नियमित शिक्षा प्रक्रिया को औपचारिक शिक्षा कहा जाता है। विघालयों , कॉलेजों , विश्वविघालयों एंव अन्य संस्थाओं में जाकर छात्र जो शिक्षा प्राप्त करते है वह औपचारिक शिक्षा के अंतर्गत आती है। औपचारिक शिक्षा को योजनाबद्ध शिक्षा , नियमित शिक्षा या सचेत शिक्षा भी कहते है। अनौपचारिक शिक्षा-         अनियमित शिक्षा ( संस्था के बन्धन से मुक्त शिक्षा) को अनौपचारिक शिक्षा कहा जाता है। यह शिक्षा छात्र स्वयं वातावरण से सीखते है। इसे छात्र अपने परिवार , आस-पड़ोस कही से भी प्राप्त कर सकता है। यह शिक्षा जीवन पर्यन्त चलती रहती है।   👇👀👇 औपचारिक और अनौपचारिक शिक्षा में अन्तर   1.    औपचारिक शिक्षा नियमित होती है।        अनौपचारिक शिक्षा अनियमित होती है।   2.  औपचारिक शिक्षा को छात्र दूसरे की सहायता ...