हिंदी भाषा पर विद्वानों के विचार व कथन। राजभाषा हिंदी
हिंदी भाषा पर विद्वानों के विचार व कथन Ø महात्मा गाँधी जी- ‘’ हिन्दी सम्पूर्ण देश के जन-जन की भाषा है। हिन्दी ही एकमात्र भाषा हमारी राष्ट्रभाषा हो सकती है। कोई भी राष्ट्र तब तक उन्नति नहीं कर सकता जब तक कि इसकी कोई राष्ट्रभाषा न हो। ” Ø मैथिलीशरण गुप्त जी- ‘’ हिन्दी है भारत की बिंदी , हिंदी है भारत की पहचान , हिंदी से ही तो हम सबकी , बनती है सच्ची पहचान। ” Ø स्वामी दयानंद- ‘ ’ हिंदी द्वारा सारे भारत को एक सूत्र में पिरोया जा सकता है। '' Ø महावीर प्रसाद द्विवेदी- ‘’ आप जिस तरह बोलते है , बातचीत करते है , उसी तरह लिखा भी कीजिए। भाषा बनावटी नहीं होनी चाहिए। ‘’ Ø सुमित्रानंदन पंत- ‘’ हिंदी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलतम स्त्रोत है। ’’ Ø पंडित जवाहरलाल नेहरु- ‘’ हिंदी हमारे देश को एक सूत्र में बाँधने वाली भाषा है। ‘’ Ø सुभाषचन्द्र बोस- '' देश के सबसे बड़े भूभाग में बोली जाने वाली हिन्दी , राष्ट्रभाषा पद की अधिकारिणी है। ’' Ø भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद- ‘’ जिस देश को अपनी भाषा और अपने साहित्य के गौरव ...