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Showing posts from February, 2022

वचन (Number)

                 वचन ( Number) वचन का शाब्दिक अर्थ है- ‘ संख्यावचन ’ । संख्यावचन को संक्षेप में वचन कहते है। संज्ञा , सर्वनाम , विशेषण और क्रिया के जिस रुप से संख्या का बोध हो , उसे वचन कहते है। अर्थात् जिस रुप से किसी व्यक्ति या वस्तु के एक या एक से अधिक (अनेक) होने का पता चलता है उसे वचन कहते है। वचन के प्रकार:- हिंदी में वचन के दो प्रकार है- 1.   एकवचन 2.   बहुवचन एकवचन-       विकारी शब्द के जिस रुप से एक पदार्थ या व्यक्ति का बोध होता है उसे एकवचन कहते है ; जैसें- लड़का , लड़की , बच्चा , नदी , घोड़ा आदि। बहुवचन- विकारी शब्द के जिस रुप से एक से अधिक पदार्थों अथवा व्यक्तियों का बोध होता है उसे बहुवचन कहते है ; जैसें- लड़के , बच्चे , लड़कियाँ , नदियाँ आदि। एकवचन और बहुवचन के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु:-                  एकवचन और बहुवचन के कुछ महत्वपूर्ण बिंदु  इस प्रकार है- 1 आदरणीय या सम्मानीय व्यक्तियों को बहुवचन...

क्रिया एवं उसके भेद

                 क्रिया एवं उसके भेद जिस शब्द से किसी काम का करना या होना समझा जाए , उसे क्रिया कहते है जैसें- पढ़ना , खाना , पीना , जाना आदि। क्रिया विकारी शब्द है , जिसके रुप लिंग , वचन और पुरुष के अनुसार बदलते है। धातु- क्रिया का मूल धातु है। धातु क्रियापद के उस अंश को कहते है , जो किसी क्रिया के प्राय: सभी रुपों में पाया जाता है। या जिन मूल अक्षरों से क्रियाएँ बनती है , उन्हें धातु कहते है। जैसें-    पढ़ना= पढ़+ना (इसमें पढ़ धातु है और ना प्रत्यय है)    खाना= खा+ना (खा धातु , ना प्रत्यय) हिंदी में क्रिया का सामान्य रुप मूलधातु में ना जोड़कर बनाया जाता है। क्रियाएँ धातुओं के अलावा संज्ञा और विशेषण से भी बनती है जैसें- काम+आना = कमाना। चिकना+आना = चिकनाना। दुहरा+आना = दुहराना। क्रिया के भेद- रचना की दृष्टि से क्रिया के दो भेद है- 1.     सकर्मक क्रिया (Transitive Verb) 2.     अकर्मक क्रिया (Intransitive Verb) सकर्मक क्रिया-        ...

पर्यायवाची शब्द (Parayayvachi Shabd)

                 पर्यायवाची शब्द जिन शब्दों के अर्थ में समानता हो , उन्हें पर्यायवाची शब्द कहते है। अग्नि—आग , पावक , अनल , दहन , धूमकेतु।   असुर- दानव , दैत्य , दनुज , राक्षस , निशाचर। आँचल- पल्ला , छोर , दामन , छोर। आकाश- गगन , नभ , अम्बर , व्योम , अंतरिक्ष। अमृत- पीयूश , सुधा , सोम , अमिय , जीवनोदक। अध्यापक- आचार्य , गुरु , शिक्षक , प्रवक्ता , व्याख्याता। आँख- अक्षि , नेत्र , लोचन , नयन , चक्षु , विलोचन। आभूषण- अलंकार , गहना , जेवर , भूषण , आभरण। आश्रम- मठ , विहार , कुटी , संघ , अखाड़ा। अश्व- वाजि , घोड़ा , घोटक , तुरंग , हय। अनाज- अन्न , धान्य , गल्ला , शस्य। आम- आम्र , रसाल , अमृतफल , फलराज , रसघट। अपमान- अवज्ञा , अनादर , तिरस्कार , निरादर , बेइज्जती। आनंद- हर्ष , प्रमोद , आमोद , सुख , प्रसन्नता , उल्लास। इंद्र- सुरपति , महेंद्र , देवराज , कौशिक , पुरंदर। इच्छा- चाह , कामना , आकांशा , अभिलाषा , मनोरथ। ईर्ष्या- द्वेष , जलन , डाह , कुढ़न। ईश- अज , ईश्वर , ब्रह्मा , परमात्मा , परमेश्वर। इंद्रधनुष- इंद्रायुध , ...