वचन (Number)
वचन (Number)
वचन का शाब्दिक अर्थ है- ‘संख्यावचन’।
संख्यावचन को संक्षेप में वचन कहते है।
संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण और क्रिया के जिस रुप से संख्या का
बोध हो, उसे वचन कहते है। अर्थात् जिस रुप से किसी व्यक्ति
या वस्तु के एक या एक से अधिक (अनेक) होने का पता चलता है उसे वचन कहते है।
वचन के प्रकार:-
हिंदी में वचन के दो प्रकार है-
1. एकवचन
2. बहुवचन
एकवचन-
विकारी शब्द के जिस रुप से एक पदार्थ या व्यक्ति का
बोध होता है उसे एकवचन कहते है; जैसें- लड़का, लड़की, बच्चा, नदी, घोड़ा आदि।
बहुवचन-
विकारी शब्द के जिस रुप से एक
से अधिक पदार्थों अथवा व्यक्तियों का बोध होता है उसे बहुवचन कहते है; जैसें- लड़के, बच्चे, लड़कियाँ,
नदियाँ आदि।
एकवचन और बहुवचन के कुछ महत्वपूर्ण
बिंदु:-
एकवचन और बहुवचन के कुछ महत्वपूर्ण
बिंदु इस प्रकार है-
1 आदरणीय या सम्मानीय
व्यक्तियों को बहुवचन में रखते है जैसें-
1 पिताजी आ रहे हैं।
2 तुलसीदास जी श्रेष्ठ कवि
थे।
3 गुरु जी आज नहीं आये।
4 श्री रामचन्द्र वीर थे।
2 वचन के कुछ शब्दों का
प्रयोग हमेशा ही बहुवचन में होता है जैसें- प्राण, दर्शन,
आँसू, लोग, बाल, दाम, होश, समाचार, हस्ताक्षर आदि।
उदाहरण-
1 दर्शन- मैनें दर्शन कर
लिये।
2 होश- मेरे होश उड़ गये।
3 आँसू- मेरे आँसू
निकल पड़े।
4 समाचार- आज के समाचार क्या
हैं?
5 दाम- तुम्हारे दाम ज्यादा
हैं।
6 लोग- लोग कहते रहते हैं।
7 बाल- मैनें बाल कटा लिए।
3 कुछ शब्द हमेशा ही एकवचन में प्रयुक्त होते है जैसें- जनता, माल, सामान, सामग्री, क्रोध, वर्षा, पानी, हवा, जल, छाया, आकाश, सत्य, मिथ्या या झूठ, दल, टोली आदि।
उदाहरण-
1 माल- माल लुट गया।
2 जनता- जनता भूल गई।
3 सामग्री- सामग्री जल गई।
4 पानी- बाल्टी में पानी भर
लो।
5 हवा- तेज हवा चल रही है।
6 आकाश- आकाश में बादल छाए
है।
4 प्रत्येक तथा हरएक या हरेक
का प्रयोग सदा एकवचन में होता है जैसें-
1 प्रत्येक व्यक्ति यही
कहेगा।
2 हरएक कुँआ मीठे जल का नहीं
होता।
5 द्रव्यवाचक संज्ञाओं का
प्रयोग एकवचन में होता है जैसें- तेल, घी, पानी, दूध, दही, लस्सी, आदि।
उदाहरण-
1 पानी- पानी भर लो।
2 तेल- गुलाब का तेल अच्छा
है।
3 दूध- दूध सेहत के लिए
लाभदायक है।
6 धातुओं की जाति बताने वाली
संज्ञाओं का प्रयोग एकवचन में ही होत है जैसें- सोना, चाँदी, लोहा, धन।
उदाहरण-
1 सोना- सोना सस्ता हो गया।
2 चाँदी- चाँदी सस्ती है।
3 धन- उसके पास बहुत धन है।
4 लोहा- लोहा भारी है।
7 अनेकों अशुद्ध है, अनेक शुद्ध है।
उदाहरण-
1 वहाँ अनेक (अनेकों) लोग
थे।
2 बाग में अनेक (अनेकों)
वृक्ष थे।
3 इस ग्रन्थ की अनेक
(अनेकों) विशेषताएँ है।
एकवचन से बहुवचन बनाने के नियम-
1 पुलिंग संज्ञा के आकारांत (आ) को एकरांत (ए) कर देने से बहुवचन बनता है जैसें-
बेटा- बेटे लड़का- लड़के
जूता- जूते कपड़ा- कपड़े
गधा- गधे घोड़ा- घोड़े
केला-केले पहिया- पहिये
2 अकारांत स्त्रीलिंग शब्दों का बहुवचन संज्ञा के अंतिम ‘अ’ को ‘एँ’ कर देने से बनता है जैसें-
किताब-
किताबें गाय- गायें
रात- रातें कलम- कलमें
बहन- बहनें आदत- आदतें
पुस्तक- पुस्तकें सड़क- सड़कें
3 आकारांत (आ) स्त्रीलिंग एकवचन संज्ञा शब्दों में ‘एँ’ लगाने से बहुवचन बनता है जैसें-
कविता-
कविताएँ कथा- कथाएँ
वस्तु-
वस्तुएँ लता- लताएँ
कामना-
कामनाएँ शाखा- शाखाएँ
अध्यापिका- अध्यापिकाएँ माता- माताएँ
4 जिन स्त्रीलिंग संज्ञाओं के अंत में ‘या’ आता है, उनमें ‘या’ के ऊपर चंद्रबिंदु लगाने से बहुवचन बनता है जैसें-
डिबिया-
डिबियाँ चिड़िया- चिड़ियाँ
गुड़िया-
गुड़ियाँ बिंदिया- बिंदियाँ
चुहिया- चुहियाँ बुढिया- बुढियाँ
5 इकारांत या ईकारांत स्त्रीलिंग संज्ञाओं के अंतिम वर्ण ‘इ’ या ‘ई’ को ‘याँ’ कर देने से बहुवचन बनता है जैसें-लड़की- लड़कियाँ नारी- नारियाँ
स्त्री- स्त्रियाँ नीति- नीतियाँ
रीति- रीतियाँ मछली- मछलियाँ
नदी- नदियाँ थाली- थालियाँ
6 सभी इकारांत और ईकारांत संज्ञाओं को बहुवचन बनाने के लिए अंत में ‘यों’ जोड़ा जाता है ‘इकारांत’ शब्दों में ‘यों’ जोड़ने से पहले ‘ई’ का ‘इ’ कर दिया जाता है जैसें-
मुनि- मुनियों गली- गलियों
नदी- नदियों साड़ी- साड़ियों
श्रीमती- श्रीमतियों गाड़ी- गाड़ियों
2 7 संज्ञा के पुलिंग अथवा स्त्रीलिंग रुपों में
बहुवचन का बोध प्राय: गण, वर्ग, जन,
लोग, वृंद आदि लगाकर किया जाता है जैसें-
पाठक- पाठकगण आप- आपलोग
साधु- साधुलोग बालक-
बालकगण
गुरु- गुरुजन नारी-
नारीवृंद
अधिकारी- अधिकारीवर्ग़ स्त्री- स्त्रीजन
Comments
Post a Comment