गद्य और पद्य में अंतर/गद्य क्या है? पद्य क्या है?
गद्य और पद्य
गद्य क्या है?
§ गद्य और पद्य हिंदी साहित्य की दो मुख्य विधाएँ है।
§ गद्य शब्द ‘गद्’ धातु के साथ ‘यत्’ प्रत्यय
जोड़ने से बनता है। ‘गद्’ का अर्थ
होता है- बोलना, बतलाना या कहना। गद्य का लक्ष्य विचारों या भावों
को सरल, सहज व सामान्य भाषा में प्रकट करना होता है। कहानी, एकांकी, उपन्यास, नाटक, निबंध इत्यादि
गद्य है।
पद्य क्या है?
§ पद्य (काव्य) उस छन्दोबद्ध एवं लयात्मक साहित्यिक रचना को कहते है, जो श्रोता या पाठक के मन में भावात्मक आनन्द की अनुभूति करता है। कविता, दोहा, गीत, भजन, चौपाई, सोरठ इत्यादि पद्य है।
गद्य और पद्य में अंतर-
💧गद्य लिखने वाले को 'लेखक’ कहते है।
पद्य लिखने वाले को 'कवि’ कहते है।
💧 गद्य अनुच्छेद (पैराग्राफ़) में लिखा जाता है।
पद्य विभिन्न चरणों (पंक्तियों) में लिखा जाता है।
💧 गद्य में विषय विचार- प्रधान होते है।
पद्य में विषय भाव- प्रधान होते है।
💧 गद्य में मानवीकरण नहीं होता है।
पद्य में मानवीकरण होता है।
💧 गद्य में यति, गति तथा मात्राओं की गणना का ध्यान नहीं रखा जाता है। पद्य में यति, गति तथा मात्राओं की गणना का ध्यान रखा जाता है।
💧 गद्य में स्वतंत्र कल्पना नहीं की जाती है।
पद्य में स्वतंत्र कल्पना की जा सकती है।
💧गद्य विधा के अन्तर्गत कहानी, एकांकी, उपन्यास, नाटक, निबंध, पत्र आदि आते है।
पद्य के अन्तर्गत कविता, दोहा, गीत, गाना, भजन, गजल आदि आते है।
💧 गद्य में प्रासंगिक कथाएँ नहीं होती है।
पद्य में प्रासंगिक कथाएँ होती है।
💧 गद्य में लय नहीं होता है।
पद्य लयात्मक होते है।
💧 गद्य के वाक्य सरल एवं स्पष्ट होते है।
पद्य रचना का अर्थ विशेष होता है। ये रस और छंद से युक्त होते है।
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