समरुपी भिन्नार्थक शब्द/हिंदी व्याकरण- श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द 100 शब्द/

 समरुपी भिन्नार्थक शब्द-

जो शब्द पढ़ने अथवा सुनने में लगभग एक से लगते है, परंतु अर्थ की दृष्टि से भिन्न होते है श्रुतिसमभिन्नार्थक शब्द कहलाते है। इन्हें समरुपी, समोच्चरित, समध्वनि और युग्म शब्द भी कहते है।

जैसें- तरंग और तुरंग दोनों शब्दों के उच्चारण में कोई खास अंतर नही है परन्तु अर्थ में भिन्नता है। तरंग- लहर और तुरंग- घोड़ा। 

     तप्त- गर्म         तृप्त- संतुष्ट

     तरंग- लहर        तुरंग- घोड़ा

     तरणी- नौका       तरणि- सूर्य

     निर्जर- देवता       निर्झर- झरना

     नीर- पानी          नीड़- घोंसला

     नियत- निश्चित     नीयत- इच्छा

     तड़ाक- जल्दी       तड़ाग- तलाब

     शस्त्र- हथियार      शास्त्र- ग्रंथ

     पति- स्वामी        पत- सम्मान 

     कृति- रचना         कीर्ति- यश

     कपी- घिरनी         कपि- बंदर

     बात- कथन          वात- हवा 

     छत्र- छाता           छात्र- विद्यार्थी

     अभिराम- सुंदर       अविराम- लगातार

     प्रसाद- भोग          प्रासाद- महल

     बान- आदत,चमक     बाण- तीर

     परिताप- दु:ख         प्रताप- पराक्रम

     निहत- मरा हुआ      निहित- छिपा हुआ

     बहु- बहुत            बहू- पुत्रवधू

     इत्र- सुगंध           इतर- दूसरा

     कृपण- कंजूस         कृपाण- कटार

     पानी- जल            पाणि- हाथ 

     पास- नजदीक         पाश- बंधन

     वस्तु- चीज           वास्तु- मकान

     कोश- शब्द-संग्रह        कोष- खजाना

     दूत- संदेहवाहक         द्यूत- जुआ

     आरति- विरक्त,दु:ख    आरती- धूप-दीप

     अधम- नीच          अधर्म- पाप

     सुधी- बुद्धिमान       सुधि- स्मरण

     भवन- महल          भुवन- संसार 

     अवधि- समय         अवधी- भाषा

     दिवा- दिन           दीवा- दीया, दीपक

     उदार- दयालु         उधार- ऋण

     असन- भोजन         आसन- बैठने वाला

     मूल- जड़             मूल्य- कीमत

     सुखी- आनंदित         सखी- सहेली

     रग- नस              राग- लय

     सुर- देवता,लय         सूर- अंधा, सूर्य 

     सिता- चीनी            सीता- जानकी 

     अलि- भ्रमर             अली- सखी

     अब्ज- कमल           अब्द- बादल, वर्ष 

     अचल- जड़            अचला- कीमत

     वारीश- समुद्र           बारीश- वर्षा

     धरा- धरती            धारा- पानी का प्रवाह

     वदन- मुख            बदन- शरीर  

     गुर- उपाय             गुरु- शिक्षक

     धेनु- गाय              धनु- धनुष

     रिक्त- खाली           रक्त- खून  

     पवन- वायु             पावन- पवित्र

     योग- जोड़             योग्य- निपुण 

     अनु- पीछे             अणु- छोटा 

     व्रण- घाव             वर्ण- अक्षर   

     नम्र- विनती            नर्म- कोमल 

     प्रहार- चोट             परिहार- त्याग 

     सुगंध- खुशबु           सौगंध- शपथ  

 

Comments

Popular posts from this blog

तत्सम-तद्भव शब्द

हरिवंशराय बच्चन का जीवन परिचय/साहित्यिक परिचय/

सर्वनाम PRONOUN