भवानी प्रसाद मिश्र का जीवन परिचय

 भवानी प्रसाद मिश्र का जीवन परिचय

भवानी प्रसाद मिश्र प्रयोगवादी काव्यधारा के प्रमुख कवि है इनका जन्म 29 मार्च,1913 ई. में मध्य प्रदेश के होशंगाबाद जिले के टिगरिया नामक गाँव में हुआ था

👉पिता का नाम पण्डित सीताराम मिश्र था।

👉माता का नाम गोमती देवी था।

👀शिक्षा- इनकी प्रारम्भिक शिक्षा होशंगाबाद और जबलपुर में हुई। इन्होंने जबलपुर से बी.ए की परीक्षा उतीर्ण की। इनकी हिंदी, संस्कृत और अग्रेजी भाषा पर अच्छी पकड़ थी। भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लेने के कारण इन्हें कई बार जेल भी जाना पड़ा।

इन्होंने महात्मा गाँधी द्वारा संस्थापित महिला आश्रम, वर्धा में अध्यापन कार्य भी किया। इन्होंने हैदराबाद से निकलने वाली मासिक पत्रिका कल्पना का सम्पादन भी किया। मिश्र जी आकाशवाणी से भी जुड़े हुए थे। 

‘’कुछ लिख के सो, कुछ पढ़ के सो तू

जिस जगह जागा सवेरे, उस जगह से बढ़ के सो।''

👀पुरुस्कार-

भवानी प्रसाद मिश्र को अनेक पुरुस्कारों से सम्मानित किया गया।

इनको सन् 1972 ई. में बुनी हुई रस्सी काव्य कृति के लिए साहित्य अकादमी पुरुस्कार से सम्मानित किया गया। इन्हें मध्यप्रदेश शासन का शिखर सम्मान, दिल्ली प्रशासन का गालिब पुरुस्कार तथा भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। 

👉रचनाएँ-  भवानी प्रसाद मिश्र की रचनाएँ इस प्रकार है-

काव्य संग्रह- सतपुड़ा के जंगल, सन्नाटा, गीत फरोश, बुनी हुई रस्सी, घर की याद, खुशबु के शिलालेख, गाँधी पंचशति, चकित है दु:ख, अंधेरी कविताएँ आदि।

👉साहित्यिक विशेषताएँ-

          भवानी प्रसाद मिश्र जी के काव्य में समाज सुधार की भावना देखी जा सकती है। इन्होंने अपने साहित्य में निम्नवर्गीय किसानों और मजदूरों से जुड़ी समस्याओं का वर्णन किया है। ये गाँधीवादी विचारधारा से अत्यधिक प्रभावित थे इसलिए इन्होंने अपने काव्य में सत्य, अहिंसा, प्रेम और करुणा का वर्णन किया है। इन्होंने ग्रामीण जीवन और संस्कृति का भी वर्णन अपने काव्य में किया है। 

👉भाषा शैली- मिश्र जी की भाषा, सरल, सहज व स्वभाविक है। इनकी भाषा में हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत शब्दों के साथ तत्सम और तद्भव शब्दों का भी सुंदर प्रयोग मिलता है। सहजता, सरलता तथा स्पष्टता इनकी भाषा के प्रमुख गुण है। इन्होंने अपनी भाषा में मुहावरों और अलंकारों का भी प्रयोग किया है। अत: इनकी भाषा सरल, सहज, स्वभाविक, आकर्षण और प्रवाहमयी है। 

👉मृत्यु-

मिश्र जी का निधन सन् 1985 ई. में हो गया था। 


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