मधु कांकरिया का जीवन परिचय/कक्षा 12वी/हिंदी लेखिका/

 मधु कांकरिया का जीवन परिचय


मधु कांकरिया हिन्दी साहित्य की प्रतिष्ठित लेखिका है। इनका जन्म सन् 1957 में कोलकता में हुआ था। इन्होंने कोलकता विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में एम. ए. की परीक्षा उतीर्ण की। इनको किताबें पढ़ने का बहुत शौक था। अपने कॉलेज के दिनो से ही इन्होंने कहानियाँ लिखना प्रारंभ कर दिया था।

मधु कांकरिया का हिंदी के गद्य साहित्य में एक विशिष्ट स्थान रहा है। इनके लेखन कार्य का मुख्य क्षेत्र गद्य है।

👉पुरुस्कार-

    मधु कांकरिया को अनेक पुरुस्कारों से सम्मानित किया गया।

    सन् 2008 में कथा क्रम सम्मान

    सन् 2009 में समाज गौरव सम्मान और हेमचंद आचार्य                 साहित्य सम्मान

    सन् 2012 में विजय वर्मा कथा सम्मान पुरुस्कार

    सन् 2015 में शिवकुमार मिश्र स्मृति कथा सम्मान

    सन् 2018 में प्रेमचन्द स्मृति कथा सम्मान

    सन् 2019 में मीरा स्मृति सम्मान

सन् 2020 में शरत चन्द्र साहित्य सम्मान से सम्मानित किया    गया।

👉रचनाएँ-

          मधु कांकरिया हिंदी के गद्य साहित्य की प्रसिद्ध लेखिका है। इनकी रचनाएँ इस प्रकार है-

कहानी संग्रह-

   बीतते हुए, चिड़िया ऐसे मरती है, भरी दोपहरी के अँधेरे, स्त्री मन की कहानियाँ, अंत में ईशु, दस प्रतिनिधि कहानियाँ, युद्ध और बुद्ध आदि।

उपन्यास-

           खुले गगन के लाल सितारे, सलाम आखिरी, पत्ताखोर, हम यहाँ थे, सेज पर संस्कृत आदि।

यात्रा-वृतांत- 

    बादलों में बारुद, साना-साना हाथ जोड़ि आदि।

👉साहित्यिक विशेषताएँ-

मधु कांकरिया का हिंदी के गद्य साहित्य में एक महत्वपूर्ण स्थान रहा है। इन्होंने अपनी कहानियों में सामान्य जन जीवन की पीड़ाओं और समस्याओं का चित्रण किया है। समाज में व्याप्त अनेक समस्याएँ जैसें- संस्कृति, महानगर की घुटन और असुरक्षा के बीच युवाओं में बढ़ती नशे की आदत, लालबत्ती इलाकों की पीड़ा तथा नारी अभिव्यक्ति इनकी रचनाओं के विषय रहे है।

👉भाषा शैली-

मधु कांकरिया की लेखन शैली गद्य है। इनकी भाषा, सरल, सहज व स्वभाविक है। इनकी रचनाओं में अंग्रेजी, उर्दू, फ़ारसी शब्दों के साथ तत्सम और तद्भव शब्दावली का भी प्रयोग मिलता है। इनकी शैली में पारदर्शिता और व्यावहारिकता है। अत: इनकी भाषा सरल, सहज, स्वभाविक, आकर्षण और प्रवाहमयी है।

 

 


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