अयोगवाह वर्ण। हिंदी वर्णमाला अयोगवाह वर्ण।
हिंदी वर्णमाला अयोगवाह वर्ण
👉अयोगवाह का अर्थ
है योग न होने पर भी जो साथ रहें।
हिंदी में
अनुस्वार (ं) और विसर्ग (:) को अयोगवाह वर्ण कहते है। क्योकि यह न तो स्वर के
अंतर्गत आते है और न ही व्यंजन के अंतर्गत आते है। किंतु यह स्वरों के सहारे चलते
है अथवा स्वर के अंत में अवश्य लगते है।स्वर और व्यंजन दोनों में इनका उपयोग होता
है जैसें- चंचल, संभवत:।
👉अनुस्वार (ं)-
यह स्वर के बाद प्रयोग होता है इसकी
ध्वनि नाक से निकलती है जैसें- अंगूर, अंगद, कंगन आदि।
👉विसर्ग (:)-
अनुस्वार की तरह विसर्ग भी स्वर के बाद आता है इसका उच्चारण ‘ह’की तरह होता है। संस्कृत भाषा
में इसका अधिक प्रयोग होता है। हिंदी के तत्सम शब्दों में भी विसर्ग का प्रयोग
होता है जैसें- अत:, स्वत:, दु:ख,
प्रात: आदि।
👀आचार्य
किशोरीदास वाजपेयी का कथन है कि-
‘’ये स्वर नहीं है और व्यंजनों की तरह ये स्वरों के पूर्व नही, पश्चात् आते हैं, इसलिए व्यंजन नहीं हैं। इसलिए इन दोनों ध्वनियों को अयोगवाह कहते है।”
Comments
Post a Comment