लोकोक्तियाँ। हिंदी की महत्वपूर्ण लोकोक्तियाँ। हिंदी व्याकरण।

 लोकोक्तियाँ (कहावतें)

 अर्थ- लोकोक्ति शब्द लोक+

उक्ति से बना है जिसका अर्थ है      लोक (समाज) में प्रचलित उक्ति या कथन। 

लोकोक्तियाँ या कहावतें आम बोलचाल में इस्तेमाल होने वाले वाक्यांश को कहते है जिसका सम्बन्ध किसी न किसी पौराणिक कहानी से जुड़ा हुआ होता है। लोकोक्तियों को अंग्रेजी में Proverbs कहते है।

👉हिंदी में प्रचलित लोकोक्तियाँ

11. अपनी-अपनी ढपली अपना-अपना राग (विचारों में भिन्नता होना)

  2. ओखली में सिर दिया, तो मुसलों से क्या डर (काम करने को उतारु होना)

  3. नेकी और पूछ-पूछ कर (नेकी करने से पहले पूछने की जरुरत नहीं होती)

  4. एक पंथ दो काज (एक काम से दूसरा काम हो जाना)

  5. एक तबे की रोटी, क्या छोटी क्या मोटी (सभी लगभग एक से होना)

  6. घर का जोगी जोगड़ा, आन गाँव का सिद्ध (निकट का गुणी व्यक्ति कम सम्मान पाता है, पर दूर का ज्यादा)

  7. तेल देखो तेल की धार देखो (रुख पहचानना)

  8. जिन ढूँढ़ा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ (परिश्रम का फल अवश्य मिलता है)

  9. जो गरजते हैं वे बरसते नहीं (जो व्यक्ति बहुत बोलते है वे विशेष सफल नहीं होते)

1 10. अंधों में काना राजा (मूर्खों में कुछ पढ़ा-लिखा व्यक्ति)

  11. खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है (पड़ोस का असर पड़ता ही है)

  12. अकेला चना भाड़ नहीं फोड़ सकता (अकेला आदमी लाचार होता है)

   13. होनहार बिरवान कि होत चीकने पात (महान बनने वाले व्यक्तियों के गुण बचपन में/ पालने में ही नजर आने लगते है)

  14. अधजल गगरी छलकत जाए (डींग हाकना या ओछा व्यक्ति प्रदर्शन बहुत करता है

   15. खोदा पहाड़ निकली चुहिया (परिश्रम को देखते हुए बहुत कम फल मिलना)

  16. आँख का अंधा नाम नयनसुख (गुण के विरुद नाम होना)

 17. हाथ कंगन को आरसी क्या (प्रत्यक्ष को प्रमान की आवश्यकता नहीं है)

   18. आँख के अंधे गाँठ के पूरे (मूर्ख धनवान)

   19. खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे (किसी बात पर शर्मिन्दा होकर क्रोध करना)

   20. आगे नाथ न पीछे पगहा (किसी तरह की जिम्मेवारी का ना होना)

   21. तू डाल-डाल मैं पात-पात (जैसे को तैसा)

   22. आम के आम गुठलियों के दाम (दोहरा लाभ

  23. चौबे गए छब्बे बनने दुबे ही रह गए (लाभ के स्थान पर हानि होना)

   24. ऊँची दुकान फीका पकवान (केवल बाह्रा प्रदर्शन)

   25. आँख न दीदा काढे कसीदा (साधन न होने पर भी काम कर लेना)

    26. ओस चाटने से प्यास नहीं बुझती (बहुत थोड़ी सी वस्तु मिलने से तृप्ति नहीं मिलती)

    27. नाच न जाने आँगन टेढ़ा (काम न जानना और बहाना बनाना)

   28. जो बोले सो कुंडा खोले (जो सुझाव दे, वही उसकी जिम्मेदारी उठाए।

   29. न रहेगा बाँस न बजेगी बाँसुरी (न कारण होगा, न कार्य होगा)

   30. सावन हरे न भादों सूखे (सदा एक समान रहना)

   31. चिराग तले अंधेरा (अपनी बुराई नहीं दिखती)

   32. छछूँदर के सिर में चमेली का तेल (अयोग्य व्यक्ति को भारी यश या बड़ा पद मिलना)

  33. होनहार बिरवान के होते चीकने पात (होनहार के लक्षण पहले से ही दिखाई पड़ने लगते है)

  34. मान न मान मैं तेरा मेहमान (जबरदस्ती गले पड़ना)

  35. ऊँची दुकान फीका पकवान (केवल बाह्रा प्रदर्शन)

  36. जंगल में मोर नाचा किसने देखा (किसी ऐसे स्थान पर काम करना जिससे किसी को लाभ न हो)

   37. गधा खेत खाए जुलहा पीटा जाए (अपराध कोई करे और दण्ड किसी अन्य को मिले)

  38. चोर-चोर मौसेरे भाई (एक पेशे वाले आपस में नाता जोड़ लेते है)

  39. खाली दिमाग शैतान का घर (बेकार बैठने से तरह-तरह की खुराफातें सुझती है।

   40. गागर में सागर भरना (कम शब्दों में बहुत कुछ कहना)


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