मन्नू भण्डारी का जीवन परिचय



                                                            मन्नू भण्डारी का जीवन परिचय 


👉श्रीमती मन्नू भण्डारी का नाम हिंदी साहित्य के आधुनिक कथाकारों, उपन्यासकारों और कहानीकारों में बड़े सम्मान से लिया जाता है। वे आधुनिक हिन्दी कथा-साहित्य की अग्रणी महिला लेखिका मानी जाती है।

👀इनका जन्म 3 अप्रैल 1931 को जिला मंदसौर (मध्यप्रदेश) के भानपुरा गाँव में हुआ था। इनके बचपन का नाम महेंद्र कुमारी था। इनके पिता का नाम सुख सम्पत राय भण्डारी था जो एक प्रतिष्ठित लेखक और विद्वान थे, जिन्होंने हिन्दी पारिभाषिक कोश और विश्व कोश की रचना की। इनकी माता का नाम अनूप कुमारी था जो धार्मिक स्वभाव की महिला थी।

👉शिक्षा-

इनकी आरम्भिक शिक्षा अजमेर में हुई। काशी विश्वविद्यालय से इन्होंने हिंदी में एम.ए की परीक्षा उतीर्ण की। इनका विवाह 1959 में राजेंद्र यादव के साथ हुआ वे हिंदी के एक प्रसिद्ध कहानीकार है। मन्नू भण्डारी पहले कोलकता में तथा बाद में दिल्ली के मिरांडा हाऊस में हिंदी प्राध्यापिका के रुप में कार्य करती रहीं। ये विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन में प्रेमचंद सृजनपीठ की अध्यक्षा भी रही। शुरु से ही इन्हें हिंदी में कहानियाँ लिखने का शौक था। इन्होंने लेखन कार्य करने के लिए मन्नू नाम का चुनाव किया।

👉रचनाएँ-

श्रीमती मन्नू भण्डारी की रचनाएँ इस प्रकार है-

उपन्यास-

महाभोज, स्वामी, एक इंच मुस्कान, आपका बंटी।

आपका बंटी (1971)- इस उपन्यास में विवाह-विच्छेद की त्रासदी से जूझते बच्चे की संवेदनशील कथा का वर्णन हुआ है। इनका यह उपन्यास बहुत ज्यादा प्रसिद्ध हुआ। इसकी प्रतिलिपियाँ अन्य भाषाओं में भी प्रकाशित हुई और इस उपन्यास को नाटक के रूप में पूरे देश भर में दिखाया गया।

एक इंच मुस्कान (1962)- यह उपन्यास को अपने पति राजेंद्र यादव के साथ मिलकर लिखा था। इसमे आधुनिक प्रेमकथा का वर्णन है।

 👉कहानी संग्रह-

मैं हार गई, एक प्लेट सैलाब, आँखों देखा, झूठ, तीन निगाहों की एक तस्वीर, यही सच है, त्रिशंकु, मजबूरी आदि। यही सच है (1966) जिस पर आधारित फिल्म रजनीगंधा को 1974 में सर्वश्रेष्ठ फिल्म का पुरस्कार मिला।

नाटक और आत्मकथा-

बिना दीवारों का घर (1966) चर्चित नाटक।

 एक कहानी यह भी (2007) आत्मकथा।

पटकथाएँ- रजनी, निर्मला, स्वामी, दर्पण।

👉पुरस्कार-

§  दिल्ली हिन्दी अकादमी का शिखर सम्मान

§  व्यास सम्मान

§  भारतीय भाषा परिषद् कोलकता द्वारा सम्मानित

§  राजस्थान संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार

§  उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान द्वारा पुरस्कृत किया जा चुका है। 

👉साहित्यिक विशेषताएँ-

मन्नू भण्डारी का साहित्य आधुनिक युग बौद्ध से जुड़ा हुआ साहित्य है। उनकी रचनाओं में स्त्री जीवन के संघर्ष, सामाजिक यथार्थ और मानवीय संवेदनाएँ प्रमुख है। इन्होंने नई कहानी आंदोलन में अपना विशेष योगदान दिया। इन्होंने अपनी रचनाओं में राजनैतिक, सामाजिक और पारिवारिक जीवन का यथार्थ वर्णन किया है। इनके उपन्यास महाभोज में समाज की दूषित राजनीति का वर्णन किया गया है। इन्होंने अपनी रचनाओं में व्यंग्य, संवेदना और आक्रोश को मनोवैज्ञानिक आधार बनाया है।

 👉भाषा शैली-

मन्नू भंडारी ने प्राय: सरल, सहज और व्यवहारिक हिंदी भाषा का प्रयोग किया है। इनकी रचनाओं में हिन्दी भाषा के साथ-साथ लोक प्रचलित अंग्रेजी, उर्दू, देशज शब्दों की बहुलता देखी जा सकती है। इन्होंने वर्णनात्मक शैली के अतिरिक्त समास और संवाद शैली का भी प्रयोग किया है। संक्षेप में इनकी भाषा शैली सरल, सहज, प्रवाहमयी और बौद्धगम्य है।

मृत्यु-

मन्नू भण्डारी की मृत्यु 15 नवंबर 2021 को 90 वर्ष की आयु में गुरुग्राम, हरियाणा में हुई थी।

निष्कर्ष- मन्नू भंडारी हिन्दी साहित्य की सुप्रसिद्ध कथाकार थी, वे स्त्री जीवन, सामाजिक यथार्थ और राजनीति के बीच आम आदमी की पीड़ा को गहराई से प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती है। उनकी रचनाएँ आज भी सामाजिक चेतना और स्त्री विमर्श की प्रेरणा देती है।

 

 

 

 

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