वाक्य विचार॥ वाक्य के भेद

                 वाक्य विचार

वाक्य सार्थक शब्द का समूह है, जिसमें कर्ता और क्रिया दोनों होते है।

परिभाषा-

      शब्दों का ऐसा सार्थक और व्यवस्थित समूह जो किसी भाव या विचार को पूर्णत: प्रकट करता है वाक्य कहलाता है।

    वाक्य के अंग-

1    1.     उद्देश्य

     2.  विधेय

1. उद्देश्य- जिसके विषय में कुछ कहा जाए जैसे- सोहन बाजार जा रहा है। (सोहन उद्देश्य है)

2. विधेय- उद्देश्य के बारे में जो कुछ कहा जाए जैसे- सोहन बाजार जा रहा है। (बाजार जा रहा है विधेय है)

    रचना के आधार पर वाक्य के भेद-

1    1.   सरल या साधारण वाक्य

2    2.  सयुक्त वाक्य

3    3. मिश्र वाक्य

1    1. सरल या साधारण वाक्य-

             जिस वाक्य में एक क्रिया होती है और एक कर्ता होता है, उसे साधारण या सरल वाक्य कहते है। इसमें एक उद्देश्य और एक विधेय रहते है।  

जैसे- सोहन पुस्तक पढ़ता है। (सोहन उद्देश्य है, और पुस्तक पढ़ता है विधेय है)

माताजी बाजार जा रही है।

वर्षा हो रही है।

  2. सयुक्त वाक्य-

सयुक्त का अर्थ है- जोड़ना। जब दो या दो से अधिक स्वतंत्र वाक्य योजक शब्दों द्वारा जुड़े होते है उन्हें सयुक्त वाक्य कहते है।

जैसे- मैं रोटी खाकर लेटा कि पेट में दर्द होने लगा।

उसे गृह कार्य समाप्त करना था इसलिए वह देर रात तक जागता रहा।

आप चाय पीएँगे या कॉफी?

योजक शब्द- और, तथा, एवं, या, ना, किंतु, परन्तु, पर, लेकिन, फिरइसलिए, अन्यथा, वरना आदि।

 3. मिश्र वाक्य-

जिस वाक्य में एक साधारण वाक्य के अतिरिक्त उसके आश्रित कोई दूसरा वाक्य हो उसे मिश्र वाक्य कहते है। इसमें एक प्रधान वाक्य होता है और शेष उपवाक्य उस पर आश्रित होते है।

जैसे-  यदि मैं परिश्रम करता तो सफल हो जाता।

जैसा आप पढ़ाते है वैसा कोई और नही पढ़ाता।

जब राम आया तो श्याम चला गया।

मिश्र वाक्य में प्रधान वाक्य को आश्रित वाक्य से जोड़ने के लिए- जितना, उतना, जैसा, वैसा, जब, तब, अगर, यदि, जहाँ, वहाँ, इधर, उधर, तो, यघपि, तथापि आदि शब्दों का प्रयोग होता है।  

Comments

Popular posts from this blog

तत्सम-तद्भव शब्द

हरिवंशराय बच्चन का जीवन परिचय/साहित्यिक परिचय/

सर्वनाम PRONOUN