2 October--Mahatma Gandhi and Lal Bahadur Sastri Biography
{महात्मा गाँधी जी और लाल बहादुर शास्त्री जी का जीवन परिचय}
भारत के इतिहास में 2 अक्तूबर का दिन
एक खास महत्व रखता है यह दिन देश की दो महान हस्तियों या विभूतियों के जन्मदिवस के
अवसर पर मनाया जाता है।
2
अक्तूबर का दिन दो महापुरुषों ‘राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी’ और ‘लाल बहादुर
शास्त्री जी’ के जन्मदिवस के तौर पर इतिहास के पन्नों में दर्ज है। यह राष्ट्रीय
पर्व रुप में मनाया जाता है।
(राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी)
महात्मा गाँधी जी का जन्म 2 अक्तूबर सन् 1869 में गुजरात के पोरबंदर में हिंदू परिवार में हुआ था। इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था। इनके पिता का नाम करमचंद गाँधी और माता का नाम पुतलीबाई था।
इनकी प्रारम्भिक शिक्षा राजकोट में ही हुई उसके पश्चात 1888 में वे कानून की शिक्षा प्राप्त करने के लिए लंदन चले गए और वहाँ से लोटने के बाद उन्होने मुम्बई में वकालत शुरु कर दी।
इनका विवाह मात्र 13 वर्ष की आयु
(1883 ई.) में कस्तूरबा गाँधी से हो गया था।
गाँधी जी को बापू और राष्ट्रपिता के
नाम से भी जाना जाता है। इन्होने सत्य और अहिंसा के मार्ग पर चलते हुए
अंग्रेजो को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया।
संयुक्त राष्ट्र संघ ने वर्ष 2007 से
गाँधी जंयती (2 अक्तूबर) को ‘विश्व अहिंसा दिवस’ के रुप में मनाए जाने की घोषणा
की।
गाँधी जी की हत्या 30 जनवरी 1948 को
नई दिल्ली स्थित बिड़ला भवन में नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर की। महात्मा गाँधी जी
की समाधि दिल्ली राजघाट में स्थित है।
(लाल बहादुर शास्त्री जी)
लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्तूबर 1904 को उत्तर प्रदेश के
मुगलसराय में हुआ था।
लाल बहादुर शास्त्री स्वतंत्र भारत
के महान नेता और दूसरे प्रधानमन्त्री थे। वह 9 जून 1964 को भारत के प्रधानमन्त्री
बने थे।
इनका वास्तविक नाम लाल बहादुर
श्रीवास्तव था।
शास्त्री जी के पिता का नाम शारदा
प्रसाद श्रीवास्तव था। जो एक शिक्षक थे, इसलिए सब
उन्हे मुंशी जी भी कहते थे। इनकी माता का नाम रामदुलारी देवी था।
इनका विवाह 1928 ई. में मिर्जापुर
निवासी गणेशप्रसाद की पुत्री ललिता देवी से हुआ था।
शास्त्री जी ने अपनी उच्च शिक्षा
काशी विघापीठ से प्राप्त की थी। काशी विघापीठ ने
इन्हें शास्त्री की उपाधि से सम्मानित किया और तभी से इन्होने अपने नाम के साथ शास्त्री जोड़ दिया।
लाल बहादुर शास्त्री ने ‘जय जवान
जय किसान’ का नारा दिया था। उनका यह
नारा जवान और किसान के श्रम को दर्शाता है।
11 जनवरी 1966 को लाल बहादुर
शास्त्री जी का निधन ताशकंद में हो गया था। (वह 9 जून 1964 से 11 जनवरी 1966 को
अपनी मृत्यु तक लगभग अठारह महीने भारत के
प्रधानमंत्री रहे।)
शास्त्री जी को मरणोपरांत सन् 1966
ई. में भारत के सर्वोच्च अलंकरण ‘भारत रत्न’ से विभूषित (सम्मानित) किया गया।
राष्ट्र के विजयी प्रधानमंत्री होने
के नाते शास्त्री जी की समाधि का नाम भी ‘विजय घाट’ रखा गया।
................धन्यवाद................
Comments
Post a Comment